February 2025

जब मैं कलम उठाता हूं When I Write

जब मैं कलम उठाता हूं : When I Write मेरे मन में भाव कभी जब घुमड़ घुमड़ कर आते हैं ढल कर के शब्दों के रूप में वो दुनिया देखना चाहते हैं कितने मंजर कितने चेहरे कितने पराये कितने मेरे मेरे अंतस्तल मे ये सतरंगे भाव जगाते हैं जब भाव मचलने लगते हैं तब ये […]

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गंगा पाप तुम्हारे धोएगी

जीवन भर तुम पाप करो गंगा पाप तुम्हारे धोएगी इतने पापों को ढोते ढोते गंगा कब तक रोएगी   सब पाप प्रवाहित गंगा में सब अस्थि समाहित गंगा में सब द्वारों से निष्कासित हो कर जीवन निर्वासित गंगा में  

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