बहुत सुंदर कविता लिखी है सर 🙏 आपका चिंतन, परिस्थितियों और घटनाओं का मूल्यांकन/आकलन का कोई जवाब नहीं शब्दों की ऐसी माला तैयार करते हैं आपकी कविता को पढ़ने और सुनने के बाद दिल को गजब का सुकून मिलता है
जय हिंद
बहुत बहुत शुक्रिया आपकी हौंसला अफजाइयों का
मैं तो पहले से ही कायल था आपकी अच्छाइयों का
ये महफिलें लूटने वाले क्या जाने
कितना हसीन होता है साथ तन्हाइयों का ❤️❤️❤️
🙏🙏🙏
दृश्य शून्यता से आवागमन की
संभावनाओं को खा जाता हूं
————
ये कोहरा दृश्य शून्य की धज्जियां उड़ाता होगा
पर हम शिक्षक हैं कोहरे को भी फंसा देते है
सुबह वाली ड्यूटी करके कोहरे को भी हरा देते है।
बहुत सुंदर कविता लिखी है सर 🙏 आपका चिंतन, परिस्थितियों और घटनाओं का मूल्यांकन/आकलन का कोई जवाब नहीं शब्दों की ऐसी माला तैयार करते हैं आपकी कविता को पढ़ने और सुनने के बाद दिल को गजब का सुकून मिलता है
जय हिंद
कोहरे के कहर को अभिव्यक्त करती अप्रतिम कविता। “मैं हूं” सीरीज का एक और नायाब कवित्त रचना के लिए आकाश भर साधुवाद।
बहुत बहुत शुक्रिया आपकी हौंसला अफजाइयों का
मैं तो पहले से ही कायल था आपकी अच्छाइयों का
ये महफिलें लूटने वाले क्या जाने
कितना हसीन होता है साथ तन्हाइयों का ❤️❤️❤️
🙏🙏🙏
दृश्य शून्यता से आवागमन की
संभावनाओं को खा जाता हूं
————
ये कोहरा दृश्य शून्य की धज्जियां उड़ाता होगा
पर हम शिक्षक हैं कोहरे को भी फंसा देते है
सुबह वाली ड्यूटी करके कोहरे को भी हरा देते है।
बहुत सही कहा आपने 👍
शिक्षक अजेय होता है🙌