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अद्भुत यह महाकुम्भ है

अद्भुत यह महाकुम्भ है

 

अद्भुत यह महाकुम्भ है

सरस्वती यमुना गंग संग

धर्म के सब राग रंग

सब मिल गए हैं कुम्भ में

आस्थाओं के प्रसंग में

 

जप तप और दान का

आस्था के सम्मान का

कुम्भ का परिक्षेत्र है

ईश्वर के विधान का

 

महाकुम्भ का शाही स्नान

आस्था का स्नान है

ईश्वर में अंतर्ध्यान है

मनुष्यों का महासमुद्र है

यह महान अनुष्ठान है

 

लक्ष्य अमृत मोक्ष है

प्रत्यक्ष और परोक्ष है

शंका कुछ रही नही

शांति का उद्घोष है

 

संस्कृति का महाप्रयाग है

भौतिकता से बैराग है

आलौकिता से ओतप्रोत

पवित्र यह भूभाग है

 

विश्व विशाल कुटुम्ब है

संबंधों का प्रतिबिम्ब है

एक ही प्राण प्रवाह है

अद्भुत यह महाकुम्भ है

 

 

शब्द सेवा: विजय बिष्ट पहाड़ी

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