गंगा पाप तुम्हारे धोएगी Leave a Comment / Blog, Kavita, Poetry / By Vijay Bisht जीवन भर तुम पाप करो गंगा पाप तुम्हारे धोएगी इतने पापों को ढोते ढोते गंगा कब तक रोएगी सब पाप प्रवाहित गंगा में सब अस्थि समाहित गंगा में सब द्वारों से निष्कासित हो कर जीवन निर्वासित गंगा में गंगा तट पर अंतिम संस्कार