‘Hum Sar Par Kafan Baandh Kar Aayenge’, is poetic tribute to the Supreme Sacrifice made by the Sardar Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev for freedom of the country from Britishers’ colonial rule.
A million salutations to all the brave Indian martyrs with special mention of the immortal heroes Sardar Bhagat Singh, Rajguru, and Sukhdev, who sacrificed their lives for the freedom of the country 🙏🇮🇳.”
देश की आजादी के लिए मर मिटने वाले सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी सहित समस्त वीर शहीदों को कोटि-कोटि नमन 🙏🇮🇳
देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एवं उनके बलिदानों को याद करते हुए एक प्रेरणादायक कविता हम सर पर कफन बांध के आएंगे राष्ट्र को समर्पित है
हम सर पर कफ़न बांध के आएंगे
होंगे हुक्काम नशे में पर
उनके नशे उतारे जाएंगे
जो बिगड़ी नीयत वाले होंगे
वो सभी सुधारे जाएंगे
मरते दम तक लड़ते जाने के
हलफ़ उठाए जाएंगे
वो काले कानून बना लें जितने
सब धता बताए जाएंगे
वो कितने जुल्म करेंगे हम पर
हमसे पार कभी नहीं पाएंगे
हम दुश्मन के आगे नही झुकेंगे
उनको मारेंगे या मर जाएंगे
वो संगीने तानेंगे हम पर
हम सर पर कफन बांध के आएंगे
फांसी के फंदे सामने होंगे
हम इंकलाब चिल्लाएंगे
जब तक अंतिम सांस चलेगी
हर आफत से लड़ जाएंगे
मातृभूमि की रक्षा करने को
शीश चढ़ाए जाएंगे
देश की खातिर मिटने वालों में
नाम लिखाए जाएंगे
हम भारत भूमि के बेटे हैं
भारत की मिट्टी में मिल जाएंगे
फिर से अंकुर बनकर फूट पड़ेंगे
फिर से इसकी मिट्टी में उग आएंगे
फिर से इंकलाब का नारा होगा
हम आजादी का सूरज लाएंगे
जय हिन्द 🇮🇳 🙏
शब्द सेवक🙏: विजय बिष्ट ‘पहाड़ी’
भारत में शहीद दिवस दो मुख्य तिथियों पर मनाया जाता है: 30 जनवरी और 23 मार्च। ये तिथियाँ भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रेरणा के इतिहास में बहुत गहरा महत्व रखती हैं।
30 जनवरी – महात्मा गांधी का शहीद दिवस
इस दिन भारत महात्मा गांधी के बलिदान को याद करता है। गांधी जी को 30 जनवरी 1948 को दिल्ली में एक धार्मिक साम्प्रदायिक सद्भाव की प्रार्थना सभा के दौरान नाथूराम गोडसे नामक एक अति‑उग्रवादी व्यक्ति ने गोली मारकर शहीद कर दिया।
गांधी “अहिंसा”, “सत्याग्रह” और “स्वतंत्रता आंदोलन” के प्रतीक थे; उन्होंने किसी भी निरंकुश शासन के खिलाफ बिना हिंसा के लड़ाई लड़ने का मार्ग दिखाया।
उनके बलिदान के बाद देश को धक्का लगा, लेकिन उनके विचार और संदेश अभी भी भारत और दुनिया के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। इसलिए 30 जनवरी को शहीद दिवस के रूप में मनाकर न केवल गांधी की याद में श्रद्धांजलि दी जाती है, बल्कि देशभर में दो मिनट का मौन रखकर सभी शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख आदि राज घाट पर पुष्प अर्पण करते हैं।
23 मार्च – भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहीद दिवस
23 मार्च को भारत तीन युवा क्रांतिकारी सरदार भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के बलिदान को याद करता है।
इन तीनों क्रान्तिकारियों को 23 मार्च 1931 को लाहौर की जेल में फांसी दे दी गई थी, क्योंकि वे अंग्रेज सरकार के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल थे।
भगत सिंह ने अल्प उम्र में ही निरंकुश शासन और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाई। उन्होंने लाला लाजपत राय जैसे नेताओं की मृत्यु का बदला लेने के लिए कुछ घटनाओं में भाग लिया और बाद में खुद को अंग्रेजों के सामने पेश कर दिया, ताकि न्याय की जगह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाए। उनके साथ राजगुरु और सुखदेव भी इसी कारण फांसी पर चढ़ाए गए। उनकी मृत्यु ने देश भर में क्रोध और प्रेरणा दोनों जगाए और कई युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।
इसलिए 23 मार्च को भारत में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है, जब विद्यालयों, सरकारी कार्यालयों और सैन्य संस्थानों में उनके जीवन, आदर्शों और बलिदान पर श्रद्धांजली समारोह आयोजित किए जाते हैं।
These timeless lines inspire patriotism and pay tribute to the martyrs’ ultimate sacrifice.
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वाह।
काव्य पंक्तीयों की रचना अफलातून करी है।