Poetry

गंगा पाप तुम्हारे धोएगी

जीवन भर तुम पाप करो गंगा पाप तुम्हारे धोएगी इतने पापों को ढोते ढोते गंगा कब तक रोएगी   सब पाप प्रवाहित गंगा में सब अस्थि समाहित गंगा में सब द्वारों से निष्कासित हो कर जीवन निर्वासित गंगा में  

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Tribute to Mahatma Gandhi राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि

पत्थर की एक लकीर हूं मैं अधनंगा फ़कीर हूं लुटी पिटी आवाम की मैं आख़िरी जागीर हूं   अहिंसा का सिद्धांत हूं एकांत मैं नितांत हूं वे विवश हैं मेरे साथ को भले ही मैं देहान्त हूं टूटा हुआ संकल्प हूं आखिरी विकल्प हूं जरूरतें अथाह हैं मैं न्यून हूं मैं अल्प हूं मैं शून्य

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Happy Republic Day गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं

HAPPY REPUBLIC DAY 🇮🇳 गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🇮🇳   उन्नति का मूलमंत्र है मेरे देश में गणतंत्र है संविधान सर्वोपरि है यह महान लोकतंत्र है   नियति से लड़ा बढ़ा उन्नति के शिखर चढ़ा बलिदानियों का प्रण हूं मैं जिजिविषा का रण हूं मैं     गणतंत्र का गण हूं मैं इस मिट्टी

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अद्भुत यह महाकुम्भ है

अद्भुत यह महाकुम्भ है   सरस्वती यमुना गंग संग धर्म के सब राग रंग सब मिल गए हैं कुम्भ में आस्थाओं के प्रसंग में   जप तप और दान का आस्था के सम्मान का कुम्भ का परिक्षेत्र है ईश्वर के विधान का   आस्था का स्नान है ईश्वर में अंतर्ध्यान है मनुष्यों का महासमुद्र है

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मैं कोहरा हूं

मैं कोहरा हूं   काली घटाओं का सफेद चेहरा हूं चमकते सूरज पर लगा सख़्त पहरा हूं जब मैं होता हूं तो फिर बस मैं ही मैं होता हूं आंखो पर छा जाने वाला रंग सुनहरा हूं   जब मैं अपनी पर आ जाता हूं संपूर्ण क्षितिज पर छा जाता हूं दृश्य शून्यता से आवागमन

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जब मैं कलम उठाता हूं (Jab Main Kalam Uthata Hun)

जब मैं कलम उठाता हूं तो
मन कुछ कहने लगता है
जज़्बातों का मीठा दरिया 
अन्तर्मन में बहने लगता है
जज़्बातों के उस दरिया में 
मैं भी बहने लगता हूं
जो शब्द घुल गए दरिया में
उन्हें मैं कलम से कहने लगता हूं

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