Yah Laghu Sarita Ka Bahta Jal
श्री गोपाल सिंह नेपाली जी द्वारा रचित सुंदर कविता “यह लघु सरिता का बहता जल” का आनंद लेते हुए अपने मन को निर्मल कर लीजिए यह लघु सरिता का बहता जल कितना शीतल, कितना निर्मल हिमगिरि के हिम से निकल निकल, यह निर्मल दूध सा हिम का जल, कर-कर निनाद कल-कल छल-छल, तन का […]
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