जब मैं कलम उठाता हूं
(jab main kalam uthata hun)
जब मैं कलम उठाता हूं तो
मन कुछ कहने लगता है
जज़्बातों का मीठा दरिया
अन्तर्मन में बहने लगता है
जज़्बातों के उस दरिया में
मैं भी बहने लगता हूं
जो शब्द घुल गए दरिया में
उन्हें मैं कलम से कहने लगता हूं
