गंगा पाप तुम्हारे धोएगी
जीवन भर तुम पाप करो गंगा पाप तुम्हारे धोएगी इतने पापों को ढोते ढोते गंगा कब तक रोएगी सब पाप प्रवाहित गंगा में सब अस्थि समाहित गंगा में सब द्वारों से निष्कासित हो कर जीवन निर्वासित गंगा में
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