THE SPIRIT OF SPORTS: POETIC CITATION OF SPORTS ON NATIONAL SPORTS DAY

National Sports Day is celebrated on August 29 in India to mark the birth anniversary of Major Dhyan Chand.

On the occasion of this glorious day of sports, paying homage to the Father of Sports of modern India, Major Dhyan Chand ji, a poetic composition imbued with high ideals of sports, philosophy of sports and high level of sportsmanship is presented to your attention

आधुनिक भारत के खेल जगत के पहले विश्व प्रसिद्ध सुपरस्टार हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद जी के जन्मदिवस 29 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

खेलों के इस गौरवशाली दिवस के उपलक्ष्य में आधुनिक भारत के खेलों के पितामह मेजर ध्यानचंद जी को नमन करते हुए खेलों के उच्च आदर्श, दर्शन तथा उच्च स्तर की खेल भावना से ओत प्रोत काव्य रचना आप सभी के ध्यानाकर्षण हेतु प्रस्तुत है

भारत देश की पावन धरती
हमें बहुत गौरवान्वित करती
धन्य हुए इसकी रज पा कर
उत्साह नया नित हममें भरती

खेलों का यह प्यारा उपवन
फूल हम इसके प्यारे प्यारे
सत्य प्रेम के भावों से पोषित
हम भारत के राजदुलारे

उत्साह ऊर्जा से भरी भोर
शक्ति का स्पंदन चारो ओर
जीवंत यहां का हर कण हर क्षण
हर्षोल्लास से सराबोर

इन मैदानों में मैं कितना दौड़ा
जब थका कभी तो सुस्ताया थोड़ा
संकल्प पुनः ले उठ हुआ खड़ा
संघर्षों से मुंह कभी ना मोड़ा

 

यह जीवन भी खेल सरीखा है
यह अनुशासन की रेखा है
बिना श्रम प्राप्त नहीं कुछ भी
यह खेल से हमने सीखा है

खेलों का अद्भुत दर्शन है
इसमें पूर्ण समर्पण है
योग्यता ही बस मापदंड है
क्षमताओं का उच्च प्रदर्शन है

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खेलों से सीखा जीवन का दर्शन
हार-जीत भी एक आभूषण
कभी हारे कभी हार के जीते
अनिश्चितताओं से भरा ये जीवन

जीवन की भी यही रीत है
कभी हार तो कभी जीत है
सदा नही एक मौसम रहता
कभी घाम तो कभी शीत है

 

रहें शिखर या रहें अधर पर
रहें सदा हम कुंदन बन कर
खेल भावना का भी यही सार है
आज नहीं तो अगली बार है

जीत के उत्सव हार के वार
हर क्षण में आनन्द अपार
जीत पर हम ना इतराते
हार से हम ना घबराते
स्पर्धा पूर्ण हो जाने पर
प्रतिद्वंदी को भी गले लगाते

 

जीवन में आशा और निराशा है
भावनाओं का अजब तमाशा है
भावनाओं को व्यक्त करे जो
खेल वो अद्भुत भाषा है

खेलों के मैदान में सीखे
हमने जीवन के मंत्र बड़े
चाहे कितनी बाधाएं हों
हम भी सीना तान खड़े
बाधाओं से लड़ जाएंगे
जीवन रण में बढ़ जाएंगे
पूरी क्षमता से संघर्ष करेंगे
पर पीठ नहीं दिखलाएंगे

 

देशप्रेम के आदर्शों पर चल कर
मेहनत की ज्वाला में जलकर
जीवन रण को तैयार हुए हम
वज्र देह के सांचे में ढल कर

 

सोने का मन लोहे का तन
प्रबल तेज सूरज से बन
संकल्प अटल ले बढ़ते जाएं
बाधाएं सब ध्वस्त करें हम
कीर्तिमान नए नित गढ़ते जाएं

 

हमने सीखा और ये जाना
सबको हमने अपना माना
मन में आशा विश्वास लिए
सीखा तूफानों में राह बनाना

चुनौतियों का स्वागत करना
प्रतिद्वंदी से भी हाथ मिलाना
खेलों ने सिखलाया हमको
सबको अपने गले लगाना

 

संकल्प शक्ति से पोषित होकर
कर्तव्य मार्ग पर बढ़ते जाना
खेलों के मैदान में सीखा
हमने नियति से लड़ जाना

 

नई रवानी नई जवानी
हम नई कथा के सूत्रधार
हम लौह लाडले भारत माता के
आंखों में सपने हजार

 

युवा शक्ति का प्रवाह यहां पर
नव भारत का निर्माण यहां पर
जग व्यापी द्वेष क्लेश से मुक्त
सर्व धर्म सम्भाव यहां पर

 

राग द्वेष अभिमान को तज कर
देश प्रेम के मंत्र को भज कर
नव भारत का निर्माण करें हम
नव ऊर्जा और संकल्पों से सज कर

 

शब्द सेवा: विजय बिष्ट ‘पहाड़ी’

 

5 thoughts on “THE SPIRIT OF SPORTS: POETIC CITATION OF SPORTS ON NATIONAL SPORTS DAY”

  1. Krishna Pratap Singh

    The poem conveys that sport is not only about winning or losing—it is about nurturing passion, learning resilience, and striving towards excellence. It celebrates sport as a beautiful metaphor for life itself.

    1. Well said Sir 👍
      Thanks for your thoughtful words.
      Sports is a way of life. It make you understand life, prepare you to live life meaningfully and purposefully.
      Sports is philosophy in itself. Ultimately it make you a better human being

  2. Devote your one hour inkhel ke Madian mein you prove it in your words physical educator is sculptural I have studied but he /she is a good writer /poet. Proud of you.

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